बुलंदशहर: हाईडिल कॉलोनी स्थित बिजली विभाग कार्यालय के बाहर विद्युत कर्मचारियों ने जोरदार हड़ताल और धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस एकदिवसीय कार्य बहिष्कार में कर्मचारियों ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के प्रस्तावित निजीकरण का पुरजोर विरोध किया। कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण से न केवल उनकी नौकरियां खतरे में पड़ेंगी, बल्कि आम जनता को भी महंगी बिजली का बोझ उठाना पड़ेगा।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल, वीडियो
क्यों की हड़ताल
इस प्रदर्शन का मुख्य लक्ष्य सरकार को निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार के लिए मजबूर करना था। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि निजी कंपनियों के हाथों बिजली वितरण सौंपने से सेवा की गुणवत्ता खराब होगी और बिजली की कीमतों में भारी वृद्धि होगी। इसके अलावा, सरकारी कर्मचारियों के रोजगार, पेंशन और अन्य लाभों पर भी संकट मंडराएगा। कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि निजीकरण जनता और कर्मचारियों, दोनों के लिए घातक साबित होगा।
राष्ट्रव्यापी आंदोलन की गूंज
यह हड़ताल सिर्फ बुलंदशहर तक सीमित नहीं थी। देशभर के विद्युत कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर इस राष्ट्रव्यापी विरोध में हिस्सा लिया। समिति ने साफ शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया, तो आने वाले दिनों में और उग्र आंदोलन छेड़े जाएंगे। कर्मचारियों ने सरकार से निजीकरण की नीति को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
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