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चिंगरावठी हिंसा मामले में शहीद इंस्पेक्टर के बेटे श्रय बोले- ‘7 साल बाद पिता को मिला इंसाफ, हाईकोर्ट में भी उनकी शहादत के लिए लड़ूंगा’, 5 को उम्रकैद, 33 को 7 साल की मिली है सजा

बुलंदशहर: स्याना में चिंगरावठी हिंसा मामले में सात साल बाद शहीद इंस्पेक्टर सुबोध सिंह के परिवार को इंसाफ मिला। बुलंदशहर की एडीजे-12 कोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 5 आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराकर आजीवन कारावास और 33 अन्य को 7 साल की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद शहीद के बेटे श्रय ने भावुक होते हुए कहा, “7 साल की लंबी लड़ाई के बाद मेरे शहीद पिता को आखिरकार इंसाफ मिला। अगर बचाव पक्ष हाईकोर्ट जाता है, तो मैं भी अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए हाईकोर्ट जाऊंगा। जिला कोर्ट ने निर्णय बहुत सोच समझकर सुनाया है। हाईकोर्ट में भी हम सभी फैक्ट रखेंगे।

शहीद इंस्पेक्टर सुबोध के बेटे श्रय को सुनिए, वीडियो

श्रय की दृढ़ता और परिवार का दर्द
कोर्ट के फैसले के बाद पत्रकारों से बात करते हुए श्रय ने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, “यह मेरे पिता की शहादत का सम्मान है। सात साल तक हमने इंसाफ की आस में हर कदम पर लड़ाई लड़ी। कोर्ट का यह फैसला मेरे लिए बहुत मायने रखता है।” श्रय ने आगे कहा, “अगर इस फैसले के खिलाफ कोई अपील हाईकोर्ट में होती है, तो मैं वहां भी अपने पिता के लिए इंसाफ की लड़ाई जारी रखूंगा।” उनकी आंखों में गर्व और दृढ़ता के साथ-साथ पिता के खोने का दर्द भी साफ झलक रहा था।

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क्या था स्याना हिंसा मामला?
3 दिसंबर 2018 को बुलंदशहर के स्याना में गोकशी की अफवाह के बाद भड़की हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध सिंह और एक अन्य व्यक्ति सुमित की हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। सुबोध सिंह के परिवार ने तब से इंसाफ की लड़ाई लड़ी, जिसका परिणाम आज कोर्ट के फैसले के रूप में सामने आया।

कोर्ट का फैसला, परिवार भावुक
एडीजे-12 की कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 5 मुख्य आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि 33 अन्य दोषियों को 7 साल की कैद की सजा दी। फैसले के बाद शहीद का परिवार भावुक नजर आया।

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