बुलंदशहर: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवादियों से मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सेना के जवान सूबेदार प्रभात गौड़ (48) का पार्थिव शरीर मंगलवार को उनके पैतृक गांव पाली आनंदगढ़ी, बुलंदशहर पहुंचा। शहीद के सम्मान में कोतवाली जहांगीराबाद से उनके गांव तक एक विशाल तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें क्षेत्र के हजारों लोग शामिल हुए। कुछ ही देर में सैनिक सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के गुडर वन क्षेत्र में सोमवार को हुई भीषण मुठभेड़ में सूबेदार प्रभात गौड़ आतंकियों की गोलीबारी में शहीद हो गए थे। इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-ताइबा के दो खूंखार आतंकी ढेर किए गए थे। मंगलवार को सेना के विशेष वाहन से शहीद का पार्थिव शरीर उनके गांव लाया गया। शहीद की शहादत की खबर से गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर छा गई।
क्या हुआ था?
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के गुडर वन क्षेत्र में सोमवार सुबह आतंकवादियों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में भारतीय सेना के जवान, बुलंदशहर के गांव पाली निवासी सूबेदार प्रभात गौड़ (48) वीरगति को प्राप्त हो गए। इस ऑपरेशन में सेना ने लश्कर-ए-ताइबा के दो खूंखार आतंकियों, स्थानीय आतंकी आमिर अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकी रहमान भाई को मार गिराया। ऑपरेशन में एक अन्य जवान, लांस नायक नरेंद्र सिंधु भी बलिदान हुए, जबकि तीन जवान घायल हुए हैं।
मुठभेड़ की शुरुआत
जम्मू-कश्मीर पुलिस को गुडर वन क्षेत्र में दो से तीन आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके आधार पर सेना की 9 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर), पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी), और सीआरपीएफ ने सोमवार सुबह करीब 6 बजे संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया। जैसे ही सुरक्षा बलों ने क्षेत्र को घेरना शुरू किया, छिपे हुए आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान सूबेदार प्रभात गौड़ गंभीर रूप से घायल हो गए। जवानों ने जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकियों को ढेर कर दिया। खराब मौसम के बावजूद सेना की स्पेशल फोर्सेज ने ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
आतंकियों का खतरनाक इतिहास
मारे गए आतंकी आमिर अहमद डार 30 सितंबर 2023 से सक्रिय था और पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों की हिटलिस्ट में शामिल था। दूसरा आतंकी रहमान भाई लंबे समय से पीर पंजाल क्षेत्र में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन गुडर’ नाम दिया गया।
प्रभात गौड़: एक वीर सपूत की कहानी
प्रभात गौड़ 1998 में हाईस्कूल पास करने के बाद भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनकी पहली तैनाती बैलोर में हुई थी। एक वर्ष पहले उनका तबादला जम्मू-कश्मीर में हुआ, जहां उन्हें जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) के पद पर प्रोन्नति मिली थी। उनके पिता एसपी गौड़ और भाई राजुल गौड़ को सैन्य अधिकारियों ने सोमवार सुबह उनके बलिदान की सूचना दी। मंगलवार को सेना का दल उनके पार्थिव शरीर को विशेष वाहन से उनके पैतृक गांव पाली आनंदगढ़ी लाया गया।
प्रभात गौड़ की पत्नी मनोरमा गौड़, 19 वर्षीय बेटी सोनिका (बीकॉम की छात्रा) और 11 वर्षीय बेटा खुशहाल (कक्षा 5 का छात्र) जोधपुर में रहते हैं। उनके बलिदान की खबर से गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। ग्रामीण और परिजन उनके अंतिम दर्शन के लिए घर पर जमा हो रहे हैं।
डीजीपी का दौरा और चिनार कोर का नमन
जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी नलिन प्रभात ने मुठभेड़ स्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और अभियान की निगरानी कर रहे अधिकारियों से जानकारी ली। चिनार कोर ने सूबेदार प्रभात गौड़ और लांस नायक नरेंद्र सिंधु के शौर्य और बलिदान को नमन किया। घायल जवानों को सेना के 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन जारी
पुलिस और सेना का संयुक्त सर्च ऑपरेशन मंगलवार को भी गुडर वन क्षेत्र में जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और आतंकी छिपा न हो। इस ऑपरेशन ने आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता को फिर से साबित किया है।