बुलंदशहर: स्याना हिंसा मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में जिला पंचायत सदस्य योगेश राज को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। शनिवार को योगेश राज जिला जेल से रिहा हो गए। गौरतलब है कि 1 अगस्त 2025 को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस मामले में 38 दोषियों को सजा सुनाई थी, जिसमें 33 को सात वर्ष और पांच को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।
क्या था स्याना हिंसा मामला?
3 दिसंबर 2018 को बुलंदशहर के स्याना कोतवाली क्षेत्र के चिंगरावठी में हिंसक घटना हुई थी। इस दौरान भीड़ ने सड़क जाम कर दी और चिंगरावठी पुलिस चौकी में आगजनी की। निजी और सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। इस हिंसा में तत्कालीन इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या कर दी गई थी, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी।
अदालत का फैसला
मामले में दर्ज मुकदमे के बाद 1 अगस्त 2025 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 38 दोषियों को सजा सुनाई। पांच दोषियों प्रशांत नट, राहुल, जोनी, डेविड और लोकेंद्र—को इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा दी गई। वहीं, तत्कालीन बजरंग दल जिला संयोजक और वार्ड पांच से जिला पंचायत सदस्य योगेश राज सहित 33 अन्य को सात वर्ष की सजा और अर्थदंड लगाया गया था।
हाईकोर्ट से राहत
सजा के बाद योगेश राज समेत कुछ दोषियों ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए अपील की थी। योगेश राज के अधिवक्ता ब्रूनो भूषण ने बताया कि हाईकोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर ली। कोर्ट ने 50 हजार रुपये के मुचलके और दो जमानतदारों की संतुष्टि पर रिहाई का आदेश दिया। योगेश राज ने जेल में चार वर्ष और दो माह से अधिक समय बिताया। शनिवार को सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वे जिला जेल से बाहर आ गए।