प्रतीकात्मक फोटो
बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश का बुलंदशहर देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। शनिवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 270 दर्ज किया गया। विशेषज्ञ इसे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्तर मान रहे हैं। फसल अवशेष और कूड़ा-कचरा जलाए जाने को प्रदूषण बढ़ने का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। विशेषज्ञों ने सांस और दिल के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।
AQI आंकड़ों में कहां खड़ा है बुलंदशहर?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के शनिवार के आंकड़ों के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा 280 AQI के साथ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जबकि वापी 276 AQI के साथ दूसरे और बुलंदशहर 270 AQI के साथ तीसरे स्थान पर दर्ज किया गया। अन्य शहरों में बल्लभगढ़ (258), बीकानेर (256), गाजियाबाद (242) और नोएडा (223) AQI के साथ सूची में शामिल रहे। इससे पहले 15 मई को बुलंदशहर का AQI 295 तक पहुंच चुका था, जो चिंता का विषय है।
प्रदूषण के कारण और प्रभाव
वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आए हैं। फसल अवशेष (पराली) और कूड़ा-कचरा जलाना प्रमुख कारक हैं। इसके अलावा, शहर में चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और वाहनों के कारण सड़कों पर फैलने वाली मिट्टी भी हवा को दूषित कर रही है। कुछ व्यापारी, विशेषकर सब्जी और फल विक्रेता, रात और सुबह के समय अपनी दुकानों का कचरा सड़कों पर जलाते हैं। इससे भी धुआं और प्रदूषण बढ़ रहा है। सर्दी के मौसम में नमी के कारण धूल और धुएं के कण हवा में ऊपर नहीं उठ पाते और जमीन के पास ही रहते हैं, जिससे AQI का स्तर और गंभीर हो जाता है।
स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
बढ़ते AQI के कारण हवा में धूल और धुएं के महीन कण (PM2.5 और PM10) की मात्रा बढ़ रही है, जो सांस और दिल के मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। चिकित्सकों ने ऐसे मरीजों को मास्क पहनने, घर से बाहर कम निकलने और सुबह-शाम की सैर से बचने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर AQI 300 के करीब पहुंचता है, तो यह सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। कचरा जलाने पर सख्ती, निर्माण कार्यों में धूल नियंत्रण के उपाय और पराली जलाने पर रोक जैसे कदम तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने चाहिए। साथ ही, जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है।
स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई
स्थानीय प्रशासन ने कचरा जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। पुलिस और नगर पालिका की टीमें उन इलाकों में निगरानी बढ़ा रही हैं, जहां कचरा जलाने की शिकायतें मिल रही हैं।
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