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हापुड़: नशा मुक्ति केंद्र में बुलंदशहर निवासी युवक ने निगलीं 29 चम्मच, 19 टूथब्रश और 2 पेन, ऑपरेशन से बची जान

इलाज करने वाले चिकित्सक, फ़ोटो

हापुड़/बुलंदशहर: हापुड़ में हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां बुलंदशहर के 35 वर्षीय सचिन ने नशा मुक्ति केंद्र में रहते हुए 29 स्टील की चम्मच, 19 टूथब्रश और 2 नोकदार पेन निगल लिए। पिछले 20 दिनों से वह इन वस्तुओं को निगल रहा था। जब उसे पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई, तो परिजन उसे हापुड़ के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने साढ़े तीन घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद उसके पेट से ये सभी वस्तुएं निकालीं।

नशे की लत और नाराज भी था
बुलंदशहर निवासी सचिन नशे का आदी था। परिजनों ने उसे नशे से छुटकारा दिलाने के लिए बुलंदशहर के एक नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया था। लेकिन भर्ती होने से नाराज सचिन ने वहां उपलब्ध स्टील की चम्मच, टूथब्रश और पेन जैसी चीजें निगलना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और पेट में असहनीय दर्द के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया।

जांच में खुला चौंकाने वाला सच
अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों को सचिन के पेट में भारी मात्रा में धातु और प्लास्टिक की वस्तुएं दिखाई दीं। डॉ. श्याम कुमार और डॉ. संजय राय ने तुरंत ऑपरेशन का फैसला लिया। साढ़े तीन घंटे तक चले इस जटिल ऑपरेशन में सचिन के पेट से 29 स्टील की चम्मच, 19 टूथब्रश और 2 नोकदार पेन निकाले गए। डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन सफल रहा और सचिन की हालत अब स्थिर है। उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर घर भेज दिया गया है।

49 वस्तुओं का जमावड़ा, फिर भी आंतें सुरक्षित
डॉ. श्याम कुमार ने बताया कि सचिन ‘मैटेलिक एंड प्लास्टिक बेजोअर’ नामक स्थिति से पीड़ित था, जिसमें मरीज धातु या प्लास्टिक की चीजें निगलने का आदी हो जाता है। कुछ मरीज कपड़ा, बोरी के रेशे या बाल तक खा लेते हैं, जो पेट में जमा होकर गंभीर समस्या पैदा करते हैं। सचिन के पेट में कुल 49 वस्तुएं जमा थीं, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उसकी आंतें या अन्य अंगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। डॉक्टरों का कहना है कि अगर ये वस्तुएं आंतों तक पहुंच जातीं, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

टूटे हुए हिस्सों को अंगुली से ठूंसा
ऑपरेशन के दौरान निकाली गईं चम्मच और टूथब्रश के आगे के हिस्से टूटे हुए थे। सचिन इन वस्तुओं का अगला हिस्सा तोड़कर उन्हें मुंह में रखता और अंगुली की मदद से गले में उतार लेता था। यह प्रक्रिया उसने कई दिनों तक दोहराई।

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