प्रतीकात्मक फोटो
बुलंदशहर: पशु पालन विभाग ने हाल ही में जिले के घोड़ों में ग्लेंडर फारसी (त्वचा और श्वसन रोग) की आशंका को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। विभाग द्वारा कुछ दिन पहले घोड़ों के रक्त के नमूने हिसार (हरियाणा) स्थित लैब भेजे गए थे। लैब से प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्ट में तीन घोड़ों में इस बीमारी के संदिग्ध लक्षण पाए गए हैं। हालांकि, पुष्टि के लिए लैब ने दोबारा सैंपल मांगे हैं, जिन्हें भेजने की तैयारी चल रही है।

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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि विभाग हर माह गधों और घोड़ों के रक्त के नमूने लेकर हिसार लैब में जांच के लिए भेजता है। इस बार सदर ब्लॉक के हरतौली गांव के नेमपाल सिंह और ऊंचागांव के भड़काऊं गांव के छंगू व दीपक के तीन घोड़ों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। लैब की रिपोर्ट में इन घोड़ों में ग्लेंडर फारसी के लक्षण होने की बात सामने आई है।
सतर्कता और कार्रवाई
डॉ. शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर इन तीनों घोड़ों को तत्काल परिवार और आवासीय क्षेत्रों से अलग कर दिया गया है। साथ ही, हिसार लैब ने पुष्टि के लिए दोबारा रक्त के नमूने मांगे हैं, जो जल्द भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा, “यह जांच अभी संदिग्ध है। दोबारा जांच के बाद ही बीमारी की पूरी पुष्टि हो सकेगी।”
ग्लेंडर फारसी: एक खतरनाक बीमारी
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लेंडर फारसी एक गंभीर संक्रामक रोग है, जो पशुओं से इंसानों में तेजी से फैल सकता है। यह बीमारी त्वचा और श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है। इसके चलते विभाग ने विशेष सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। जिले में गधे और घोड़े पालने वालों को जागरूक किया जा रहा है और उनके पशुओं के सैंपल नियमित रूप से जांच के लिए भेजे जा रहे हैं।