बुलंदशहर: बुलंदशहर की स्थानीय अदालतों ने दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में कड़े फैसले सुनाए हैं, जिनमें हत्या और डकैती जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। दोनों मामलों में दोषियों को सजा और भारी अर्थदंड का सामना करना पड़ा है।
पहला मामला: 2016 की हत्या में तीनों आरोपियों को उम्रकैद
सिकंदराबाद के रमपुरा मोहल्ले में 17 दिसंबर 2016 को हुई सुनील तायल की गोली मारकर हत्या के मामले में एडीजे एफटीसी द्वितीय मनोज कुमार की कोर्ट ने तीनों आरोपियों संजीव जोशी, अनस, और आमिर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर 55,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
मृतक के बेटे लव तायल की शिकायत पर पुलिस ने संजीव जोशी (गांव सराय झाझर), अनस (आजाद नगर), और आमिर (रमपुरा) के खिलाफ मामला दर्ज किया था। घटना के बाद फरार हुए संजीव और आमिर को पुलिस ने 25 दिसंबर 2016 को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। मुठभेड़ के दौरान दोनों ने पुलिस पर गोलीबारी की थी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त 10-10 साल की सजा और 20,000-20,000 रुपये का अर्थदंड सुनाया गया। मई 2016 में सुनील तायल पर हुए एक अन्य हमले में भी संजीव जोशी को 10 साल की सजा सुनाई गई है। पुलिस ने 22 मार्च 2017 को तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
दूसरा मामला: 35 साल पुरानी डकैती और हत्या में 10 साल की सजा
पहासू क्षेत्र के वेदरामपुर गांव में 31 जुलाई 1990 को हुई डकैती और हत्या के मामले में न्यायाधीश वरुण मोहित निगम की कोर्ट ने आरोपी नब्बू उर्फ नवाब को 10 साल की कैद और 20,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
अभियोजक विजय कुमार शर्मा के अनुसार, नब्बू उर्फ नवाब ने नरेंद्र सिंह के घर में डकैती के इरादे से घुसपैठ की थी। आहट होने पर नरेंद्र सिंह जाग गए, जिसके बाद नब्बू ने तमंचे से गोली चला दी, जिससे नरेंद्र की मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने 28 मार्च 1992 को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। 35 साल बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया है
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