शाहनवाज चौधरी/गौरव शर्मा
बुलंदशहर: स्वास्थ्य विभाग का हाल किसी से छिपा नहीं है। शीर्ष अफसर इसे सुधारने की कितनी भी कोशिश कर ले, विभाग जमीन पर वही ढर्रा अपना लेता है। जिला अस्पताल हो या कोई अन्य अस्पताल नोडल अफसर होने के नाते स्वास्थ्य विभाग ही जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का जिम्मा संभालता है। ताजा मामला प्रसव के लिए आई एक महिला की डिलवरी की घोर लापरवाही का है। हालत यह रही है कि महिला को जिला अस्पताल में बेड नहीं मिला तो उसे ई-रिक्शा में उसे डिलीवरी ही करानी पड़ी।
पीड़ितों की व्यथा सुनिए
परिजन स्वाति ने बताया कि करीव 4 दिन पहले उसे अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हड्डी बड़ी हुई है। तीन चार दिन पहले से ये भर्ती थी, तब किसी ने नहीं बताया कि उसे कोई दिक्कत है। आरोप है कि अब बताया है कि उसे किसी प्राइवेट होटल में ले जाइए या उसे मेरठ रेफर करेंगे। अस्पताल कर्मियों ने कुछ नहीं बताया कि उन्हें कोई दिक्कत है। बाहर ले जाने का दवाब डाला गया तो उसे हम लेकर भी आए। बाहर पेशेंट गिर पड़ा और आखिर में उसकी डिलीवरी ई रिक्शा में करानी पड़ी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों के स्तर से पूरी लापरवाही बरती गई।
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