बुलंदशहर: स्याना में दिसंबर 2018 में हिंसा के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसले में बुलंदशहर की एडीजे-12 कोर्ट ने सभी 38 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस हिंसा में तत्कालीन थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या कर दी गई थी, साथ ही एक स्थानीय युवक सुमित की भी गोली लगने से मौत हो गई थी। कोर्ट ने इस मामले में 5 आरोपियों प्रशांत नट, डेविड, जोनी, राहुल, और लोकेंद्र मामा को इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या का दोषी ठहराया है। शेष 33 आरोपियों को बलवा, हत्या का प्रयास (धारा 307), आगजनी, और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोपों में दोषी पाया गया है। हिंसा के कुछ पुराने वीडियो अपलोड किए हैं। देखते जाईये उपद्रवियों ने किस कदर बवाल काटा और आम नागरिकों की सुरक्षा में लगे एक इंस्पेक्टर की हत्या कर दी थी।
वीडियो में बवाल करते लोग, आग बुझाती पुलिस
कोर्ट का फैसला और अगली तारीख
एडीजे-12 गोपाल जी की कोर्ट ने सभी दोषियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। सजा का ऐलान 1 अगस्त 2025 को होगा, जिसके लिए फैसला सुरक्षित रखा गया है। इस मामले में पुलिस ने गहन जांच के बाद 44 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, मुकदमे के दौरान 5 आरोपियों की मौत हो चुकी है। एक बाल अपचारी का मामला अलग से POCSO कोर्ट में विचाराधीन है।
वीडियो में इंस्पेक्टर सुबोध मृत अवस्था में पड़े मिले
क्या थी स्याना हिंसा?
3 दिसंबर 2018 को बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र के महाव गांव में कथित गौकशी की अफवाह के बाद हिंसा भड़क उठी थी। चिंगरावठी पुलिस चौकी के पास लगभग 400 लोगों की भीड़ ने गौकशी के विरोध में सड़क जाम कर दी थी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, वाहनों में आग लगा दी, और चिंगरावठी पुलिस चौकी को भी जला दिया। इस दौरान स्याना थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुबोध सिंह भीड़ को शांत करने की कोशिश कर रहे थे। उन पर हमला हुआ। भीड़ ने उन्हें खेत में घेरकर पहले पथराव किया, फिर उनकी सर्विस रिवॉल्वर छीनकर गोली मार दी। इससे उनकी मौत हो गई। हिंसा में एक स्थानीय युवक सुमित की भी गोली लगने से मृत्यु हुई थी।
चिंगरावठी कोतवाली के बाहर एकत्र पुलिसबल का वीडियो
चार्जशीट और जांच
उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने इस मामले में 3,400 पेज की केस डायरी और 103 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में बजरंग दल के स्थानीय संयोजक योगेश राज और बीजेपी यूथ विंग के पूर्व नेता शिखर अग्रवाल सहित 44 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच में पाया गया कि योगेश राज ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हिंसा भड़काने के लिए फोन पर कई बार बात की थी और भीड़ को चिंगरावठी पुलिस चौकी के सामने इकट्ठा करने में अहम भूमिका निभाई थी। अब कोर्ट के आदेश के बाद सभी को न्यायिक अभिरक्षा में रखा गया है।
विशेष लोक अभियोजक यशपाल सिंह राघव ने बताया, न्यायालय ने क्या निर्णय सुनाया, वीडियो
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