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बुलंदशहर हाईवे कांड: 9 साल बाद न्याय, मां-बेटी से सामूहिक दुष्कर्म के 5 दोषियों को आजीवन कारावास; कोर्ट बोला- ‘ऐसे राक्षसों को समाज से दूर रखें’.. आखिरी सांस तक जेल में रहें

बुलंदशहर: वर्ष 2016 के उस जघन्य हाईवे गैंगरेप मामले में आज विशेष पॉक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अपर जनपद सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो) ओम प्रकाश तृतीय ने सभी पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद तक जेल) की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक दोषी पर 1.81 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की कुल राशि पीड़ित मां और बेटी को बराबर-बराबर बांटी जाएगी।कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध इतना जघन्य है कि ऐसे दरिंदों को सभ्य समाज से हमेशा दूर रखना जरूरी है। आखिरी सांस तक ऐसे अपराधी जेल में ही रहें।

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (पॉक्सो) वरुण कुमार कौशिक ने बताया कि यह सजा महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में एक मजबूत संदेश देती है।

एडीजीसी पाक्सो वरुण कौशिक की बाइट, वीडियो देखें

दोषियों को जिला कारागार ले जाती पुलिस, वीडियो देखें

घटना की भयावह याद

29 जुलाई 2016 की रात करीब 1:30 बजे, नोएडा से शाहजहांपुर जा रहा एक परिवार कार से सफर कर रहा था। दोस्तपुर फ्लाईओवर के पास NH-91 पर आरोपियों के गिरोह ने लोहे की रॉड फेंककर कार रोकी। हथियारों के बल पर पूरे परिवार को बंधक बनाया, पुरुष सदस्यों को पीटा और बांध दिया। फिर मां और उनकी 14 साल की नाबालिग बेटी को पास के खेत में ले जाकर ढाई घंटे तक सामूहिक दुष्कर्म किया। लूटपाट के बाद आरोपी फरार हो गए। इस वारदात ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था।

मामला इतना संवेदनशील था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर जांच CBI को सौंपी गई। CBI ने जांच में पाया कि कुल 11 आरोपी थे। मुख्य सरगना सलीम बावरिया की ट्रायल के दौरान जेल में मौत हो गई। दो अन्य आरोपियों को एसटीएफ ने अलग-अलग मुठभेड़ों में मार गिराया था। तीन आरोपियों को CBI ने निर्दोष मानते हुए अलग कर दिया। बाकी बचे पांच – कन्नौज निवासी जुबैर उर्फ परवेज, साजिद और फर्रुखाबाद निवासी धर्मवीर उर्फ जितेंद्र, नरेश उर्फ संदीप बहेलिया तथा सुनील कुमार उर्फ सागर – को आज उम्रकैद की सजा मिली।

पीड़ित परिवार की लंबी लड़ाई, पीड़िता बोली- जज बनकर अपने जैसों को न्याय दिलाऊंगी

नौ साल की कानूनी जद्दोजहद के बाद पीड़ित परिवार को आखिरकार न्याय मिला। पीड़िता (जो अब कानून की पढ़ाई कर रही हैं) ने कहा कि यह फैसला उम्मीद जगाता है, लेकिन ट्रॉमा कभी खत्म नहीं होता। परिवार ने पहचान छिपाने के लिए कई बार घर और शहर बदले। उन्होंने कहा, “वे इंसान नहीं, राक्षस थे। यह सजा हमें कुछ राहत देगी, लेकिन जख्म हमेशा रहेंगे।” पीड़िता ने कहा कि कानून की पढ़ाई कर वह जज बनेगी और अपने जैसे पीड़ितों को इंसाफ दिलाएगी।

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