बुलंदशहर: 2016 की उस भयावह रात को आज भी याद कर रूह कांप जाती है। 28-29 जुलाई 2016 की रात नेशनल हाइवे-91 पर एक परिवार कार से शाहजहांपुर जा रहा था। रास्ते में बदमाशों ने उनकी गाड़ी रोकी, सभी सदस्यों को बंधक बनाया और परिवार के सामने मां और नाबालिग बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इस जघन्य अपराध ने पूरे देश को हिला दिया था।
करीब साढ़े नौ साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार न्याय की एक किरण नजर आई है। बुलंदशहर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार (20 दिसंबर 2025) को इस बहुचर्चित मामले में पांच आरोपियों को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उन्हें आईपीसी की धारा 394 (लूट), 395 (डकैती), 397 (डकैती में घातक हथियार), 376D (सामूहिक दुष्कर्म), 120B (साजिश), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत दोषी करार दिया है।
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दोषी ठहराए गए आरोपी:
जुबैर उर्फ सुनील उर्फ परवेज
साजिद
धर्मवीर उर्फ जितेंद्र
नरेश उर्फ संदीप बहेलिया
सुनील कुमार उर्फ सागर
मामले की शुरुआत में कुल 11 आरोपी बनाए गए थे, लेकिन सीबीआई जांच में तीन को क्लीन चिट मिल गई। एक आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है और तीन अन्य की पहले ही मौत हो गई। गवाहों के बयान, फॉरेंसिक सबूत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने इन पांच को दोषी पाया।
अब सभी की निगाहें 22 दिसंबर 2025 यानि आज पर टिकी हैं, जब कोर्ट सजा का ऐलान करेगा। पीड़ित परिवार ने लंबे संघर्ष के बाद इस फैसले से राहत की सांस ली है, लेकिन उनका दर्द आज भी उतना ही ताजा है। परिवार को बार-बार घर बदलना पड़ा, सामाजिक कलंक झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
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