बुलंदशहर: साल 2016 की उस दिल दहला देने वाली वारदात की गूंज आज भी देश को झकझोरती है, जब नेशनल हाईवे-91 पर एक परिवार को बंधक बनाकर मां और उसकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप किया गया था। करीब साढ़े नौ साल बाद, बुलंदशहर की मुख्य पोक्सो कोर्ट ने इस जघन्य अपराध में बचे हुए पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट अब 22 दिसंबर को सजा का ऐलान करेगी। बता दें कि उस वक्त सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार थी। सरकार को जवाब देना भी कठिन हो गया था।
घटना 28-29 जुलाई 2016 की रात की है। नोएडा का एक परिवार शाहजहांपुर जा रहा था। देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव दोस्तपुर के पास NH-91 पर अपराधियों के एक गिरोह ने उनकी कार रोकी। हथियारों के बल पर पूरे परिवार को बंधक बनाया गया और परिवार के सदस्यों के सामने ही मां और उनकी 13 साल की बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। दुखद बात यह कि उस रात नाबालिग पीड़िता को पहली बार मासिक धर्म हुआ था, जिससे उसकी शारीरिक और मानसिक हालत बेहद नाजुक थी।घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा किया था। मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई,ल। पीड़ित परिवार ने डायल-100 पर मदद मांगी लेकिन संपर्क नहीं हो सका। बाद में पीड़िता के पिता ने नोएडा पुलिस में तैनात अपने मित्र से मदद ली। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और जांच सीबीआई को सौंपी।
पुलिस ने कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया था। जांच के दौरान एक आरोपी सलीम की मौत हो गई। दो अन्य—अजय उर्फ असलम उर्फ कालिया और बंटी उर्फ गंजा उर्फ बबलू—को अलग-अलग एनकाउंटर में मार गिराया गया। तीन आरोपियों—रहीसुद्दीन, जावेद उर्फ शावेज और जबर सिंह—को सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी। बाकी बचे पांच आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली और आज उन्हें दोषी ठहराया गया।
एडीजीसी पॉक्सो वरुण कौशिक की बाइट, वीडियो देखें
फॉरेंसिक सबूतों ने केस में अहम भूमिका निभाई। पीड़िता की मां के कपड़ों पर मिले सीमेन के नमूने आरोपियों से मैच किए गए। मामले में IPC की धारा 394 (लूट), 395 (डकैती), 397 (डकैती में घातक हथियार), 376D (सामूहिक दुष्कर्म), 120B (साजिश) और पोक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत केस दर्ज हुआ था।पीड़ित परिवार आज बरेली में अज्ञात स्थान पर रह रहा है। सुनवाई के दौरान न तो पीड़िता और न ही परिवार का कोई सदस्य कोर्ट में उपस्थित हो सका। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब सजा पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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