बुलंदशहर/लखनऊ: उत्तर प्रदेश होम्योपैथी विभाग में होम्योपैथिक दवाओं की खरीद प्रक्रिया में अनियमितता की खबर सामने आई हैं। होम्योपैथिक ड्रग्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की शिकायत के अनुसार, GeM पोर्टल पर अलग श्रेणी न होने का हवाला देकर BoQ आधारित टेंडर जारी किए गए, जिससे पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई। इससे छोटे-मध्यम उद्यमों (MSME) को बाहर रखकर चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। शिकायत के अनुसार,दवा खरीद में यह गड़बड़झाला बुलंदशहर से भी जुड़ा पाया गया।

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 4.49 करोड़ के बजट में से 2.79 करोड़ केवल 23 जिलों की 662 डिस्पेंसरी को आवंटित किए गए, जबकि शेष 1. Io70 करोड़ अन्य जिलों की 922 डिस्पेंसरी में बांटे गए। विभाग द्वारा जारी आवश्यक दवा सूची का अधिकांश जिलों ने पालन नहीं किया; सूची से इतर और ब्रांड नाम वाली दवाएं खरीदी गईं। कई जिलों में टेंडर बिना ड्रग लाइसेंस की अनिवार्यता के जारी हुए, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चूक है।सबसे चौंकाने वाला तथ्य कीमतों का अंतर: एक ही 1M डाइल्यूशन दवा प्रतापगढ़ में 198 रुपये, प्रयागराज में 173, बुलंदशहर में 192, कुशीनगर में 160 और चंदौली में मात्र 34 रुपये प्रति यूनिट खरीदी गई। पहले टेंडर में यह 25-30 रुपये थी, जबकि आयुष मिशन ने 55-60 रुपये में खरीदी। विभाग ने तीन गुना ऊंची दरों पर खरीद की, जबकि 2019 के बाद नियमित टेंडर ही नहीं जारी हुए। कई टेंडरों में आपूर्तिकर्ताओं के नाम पहले से दर्ज पाए गए।एसोसिएशन ने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। यह मामला सरकारी खरीद में पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है, जिससे MSME को नुकसान और खजाने पर बोझ पड़ा।
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