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पराली जलाने पर जिला प्रशासन की सख्ती: सैटेलाइट से हो रही निगरानी.. अभी तक किसानों से वसूला 10 हजार रुपये जुर्माना

प्रतिकात्मक फ़ोटो
बुलंदशहर: जनपद में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। शासन के निर्देशों पर अमल करते हुए पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। सभी ब्लॉकों पर विशेष टीमें गठित की गई हैं। टीमें खेतों की निगरानी कर रही हैं। अब तक पराली जलाने के मामलों में 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया जा चुका है। प्रशासन का साफ कहना है कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली इस प्रथा को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।जुर्माने की दरें निर्धारित: छोटे से बड़े खेत तक सख्तीशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पराली जलाने पर जुर्माना इस प्रकार वसूला जाएगा।

2 एकड़ से कम क्षेत्र: 2,500 रुपये
2 से 5 एकड़ तक: 5,000 रुपये
5 एकड़ से अधिक: 15,000 रुपये

ये जुर्माने पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में लगाए जाते हैं। यदि कोई किसान पराली जलाते पकड़ा जाता है, तो मौके पर ही उसे रोका जाएगा और जुर्माना अधिरोपित किया जाएगा।

एडीएम फाइनेंस अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर टीमें सक्रिय हैं और जहां से भी सूचना मिलेगी, तत्काल कार्रवाई होगी।मल्टी-डिपार्टमेंटल निगरानी: राजस्व, पुलिस से लेकर कृषि विभाग तक शामिलप्रशासन ने राजस्व, पुलिस, कृषि, ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभागों की संयुक्त टीमें बनाई हैं। ये टीमें जनपद, तहसील, विकासखंड और क्षेत्रीय स्तर पर फसल कटाई के समय खेतों पर नजर रखेंगी। उद्देश्य है कि पराली जलाने की घटनाओं को शून्य स्तर पर लाया जाए। इसके अलावा, सैटेलाइट तकनीक का सहारा लिया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में भी जलाने की घटनाओं की निगरानी हो रही है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा: क्यों जरूरी है रोकथाम?पराली जलाने से वायु प्रदूषण में भारी वृद्धि होती है, जो न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है बल्कि जनस्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। धुएं से निकलने वाली जहरीली गैसें सांस की बीमारियों, आंखों की जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देती हैं। विशेष रूप से सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो जाता है। इसलिए प्रशासन किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों जैसे कम्पोस्टिंग, बायोगैस उत्पादन, मशीनों से अवशेष प्रबंधन आदि के प्रति जागरूक कर रहा है।

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