बुलंदशहर: मर्सिडीज-बेंज और हुरुन रिसर्च के ताजा अध्ययन ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर को एक नई आर्थिक ऊंचाई पर ला खड़ा किया है। पिछले चार सालों में यूपी में करोड़पतियों की संख्या दोगुनी होकर 57,700 तक पहुंच गई है, और इस आर्थिक क्रांति में बुलंदशहर जैसे छोटे शहर भी पीछे नहीं हैं। न्यूनतम 10 करोड़ रुपये की संपत्ति वाले धन्नासेठों की बढ़ती संख्या ने बुलंदशहर को यूपी के उभरते आर्थिक केंद्रों में शामिल कर दिया है।
बुलंदशहर का आर्थिक उछाल
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) चार साल में 16 लाख करोड़ से बढ़कर 26 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो चिली और चेक गणराज्य जैसे देशों की अर्थव्यवस्था के बराबर है। इस आर्थिक प्रगति का असर बुलंदशहर में भी साफ दिख रहा है, जहां करोड़पति परिवारों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बांदा, इटावा, सीतापुर, और आजमगढ़ जैसे अन्य छोटे शहरों के साथ बुलंदशहर भी यूपी की आर्थिक चमक में अपनी हिस्सेदारी जोड़ रहा है।
क्या है बुलंदशहर की खासियत?
बुलंदशहर का आर्थिक विकास स्थानीय कारोबारी माहौल, छोटे-बड़े उद्योगों, और बढ़ते निवेश के कारण तेज हुआ है। कृषि, डेयरी, और छोटे उद्यमों के साथ-साथ रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे में निवेश ने इस जिले को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। यूपी में लखनऊ, कानपुर, और नोएडा जैसे बड़े शहरों के बाद बुलंदशहर जैसे छोटे शहरों का इस सूची में शामिल होना राज्य की समावेशी आर्थिक प्रगति का सबूत है।
यूपी में करोड़पतियों का जलवा, बुलंदशहर की भी चमक
अध्ययन के मुताबिक, यूपी देश का छठा सबसे बड़ा राज्य है, जहां करोड़पतियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पूरे देश में 90 फीसदी करोड़पति छह राज्यों—महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, और पश्चिम बंगाल—में हैं। यूपी में 58 फीसदी की वृद्धि के साथ बुलंदशहर ने भी इस आर्थिक लहर में अपनी मौजूदगी दर्ज की है।
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