भारत गोयल
जहांगीराबाद। नगर पालिका में तैनात सम्पत्ति लिपिक सईद अहमद पर 28 लाख रुपये के घोटाले का मामला खुला है। पूरे मामले में आरटीआई एक्टिविस्ट सलीम सैफी ने पालिका के बाबू के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सैफ़ी ने क्षेत्रीय विधायक संजय शर्मा, पुलिस के आर्थिक अपराध अनुसंधान और एडीएम प्रशासन से इस मामले में घोटाले के आरोपी लिपिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। सलीम सैफी का वीडियो नीचे दिया हुआ है। उसे क्लिक कर पूरा देख सकते हैं।

नगरपालिका जहांगीराबाद, फ़ोटो
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2024 में नरौरा नगर पंचायत के अध्यक्ष ने जिला मुख्यालय के आलाधिकारियों से एक शिकायत की थी जिसमें उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 से वर्ष 2024 तक सईद अहमद प्रभारी लिपिक के रूप में नरौरा में तैनात थे। आरोप है कि पद पर रहते हुए वर्ष 2019 से लेकर 2021 तक लगभग 28 लाख रुपये विभिन्न कार्यों के दर्शाकर अपने नाम भुगतान कर लिया। इस मामले की जांच एडीएम प्रशासन ने डिबाई एसडीएम को सौंपी थी।
डिबाई एसडीएम ने जांच में वित्तीय अनियमितता मानी
डिबाई एसडीएम ने इस मामले की जाँच रिपोर्ट 17 मई 2025 को तत्कालीन एडीएम प्रशासन को सौंपी थी। जिसमें सईद अहमद द्वारा 28 लाख 19 हजार 375 रुपये अपने निजी खाते में अंतरित करने का प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। दो दिन बाद 19 मई को एडीएम प्रशासन(प्रभारी अधिकारी, स्थानीय निकाय) ने नरौरा नगर पंचायत को आरोपी लिपिक के खिलाफ अपने स्तर से कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि 3 माह बीत जाने के बाद भी नरौरा नगर पंचायत और नगर पालिका जहांगीराबाद दोनों एक दूसरे पर कार्यवाही का ठीकरा फोड़कर आरोपी लिपिक को बचा रही हैं।

एडीएम का नरौरा नगर पंचायत ईओ को जारी आदेश, जिसमें बाबू को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया फ़ोटो
आरटीआई एक्टिविस्ट ने बाबू के खिलाफ खोला मोर्चा, आरोप सुनिए..वीडियो देखें
एक सवाल यह भी?
मामले में एक सवाल और उठा है। नगरपालिका के जानकार बताते हैं कि किसी भी नगर निकाय में भुगतान के लिए ईओ और चेयरमैन दोनों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। यहां भुगतान के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई गई?
सम्पत्ति लिपिक बोले: आरोप बेबुनियाद, हर जांच को तैयार
नगर पालिका जहांगीराबाद में तैनात सम्पत्ति लिपिक सईद अहमद ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि ये सभी आरोप झूठे हैं।वह निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं।
ईओ ने कहा, पूरी पत्रावली भेजे नगर पंचायत
जहांगीराबाद नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मणिजी सैनी ने कहा कि कार्यवाही के लिए नरौरा नगर पंचायत से महज एडीएम प्रशासन के आदेश की एक प्रति प्राप्त हुई थी। लेकिन पूरी पत्रावली नगर पंचायत नरौरा ने भेजी ही नहीं। नरौरा नगर पंचायत से इस मामले से जुड़ी पूरी पत्रावली अवलोकन के लिए मांगी गई है, लेकिन अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।
पालिकाध्यक्ष बोले जहां गबन हुआ, वहीं हो एफआईआर
नगर पालिका जहांगीराबाद किशनपाल लोधी से इस मामले में बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यह मामला नरौरा नगर पंचायत में हुई वित्तीय अनियमितता से सम्बंधित है। इसीलिए इस मामले में पहले नरौरा नगर पंचायत को अपने स्तर से एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। उसके बाद ही यहां से कोई कार्यवाही सम्भव है।
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