बुलंदशहर: स्याना हिंसा में शहीद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के परिवार का कहना है कि उन्हें सात साल बाद इंसाफ मिला है। बुधवार को अपर सत्र न्यायालय-12 ने 38 आरोपियों को दोषी करार दिया, जिनमें पांच पर सुबोध और स्थानीय युवक सुमित की हत्या का आरोप सिद्ध हुआ। सजा का फैसला 1 अगस्त 2025 को होगा। इस बीच, शहीद की पत्नी रजनी सिंह का एक बयान चर्चा में हैं। उन्होंने और उनके बेटों ने पुलिस की नौकरी से दूरी क्यों रखी?
नोएडा में रहने वाली रजनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमें न्याय मिल गया।” मीडिया से बातचीत में उन्होंने खुलासा किया, “सुबोध ने कसम दिलाई थी कि अगर उनके साथ कुछ हो जाए, तो मैं या हमारे बेटे पुलिस की नौकरी न करें। मैंने उनकी कसम को सर्वोपरि माना।”रजनी ने बताया कि सुबोध के पिता रामप्रताप सिंह राठौर भी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर थे और शहीद हो गए थे। उनकी जगह सुबोध मृतक आश्रित कोटे से सब-इंस्पेक्टर बने, लेकिन 3 दिसंबर 2018 को स्याना में गोवंश विवाद के बाद भड़की हिंसा में वह भी शहीद हो गए।
रजनी ने कहा, “पति की शहादत के बाद भी मैंने नौकरी नहीं ली। मेरे बेटे श्रेयप्रताप मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर हैं और अभिषेक दिल्ली हाईकोर्ट में वकील। दोनों ने भी पिता की कसम निभाई। श्रेयप्रताप ने कहा, “न्यायपालिका पर हमारा विश्वास अडिग था। पुलिस की तत्पर विवेचना से साढ़े छह साल में यह फैसला आया। हम उम्मीद करते हैं कि 1 अगस्त को दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।
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