बुलंदशहर: शकरपुर गांव में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल अंकित कुमार ने नए स्कूल में तैनाती से बचने के लिए रचा नाटक उनपर ही भारी पड़ गया। स्कूल मर्ज होने के बाद नई जगह जाने से बचने के लिए प्रिंसिपल ने ग्रामीणों को भड़काकर खुद को बंधक बनवाने का ड्रामा रचा। डीएम के आदेश पर हुई जांच में उनका यह नाटक बेनकाब हो गया। बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है
क्या था पूरा मामला?
8 जुलाई 2025 को बुलंदशहर के ऊंचागांव ब्लॉक के शकरपुर गांव में उस समय हंगामा मच गया, जब प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को शिक्षकों द्वारा पास के चठेरा गांव के स्कूल में ले जाया जा रहा था। स्कूल मर्ज होने की प्रक्रिया के तहत यह कदम उठाया गया था, लेकिन ग्रामीणों और अभिभावकों ने इसका विरोध किया। गुस्साए ग्रामीणों ने प्रिंसिपल अंकित कुमार और सहायक शिक्षिका पिंकी को बंधक बना लिया और स्कूल की पठन-पाठन सामग्री अपने कब्जे में ले ली। ग्रामीणों का कहना था कि बच्चों को दूसरे गांव के स्कूल भेजना न केवल असुरक्षित है, बल्कि असुविधाजनक भी है। उनका सवाल था कि जब गांव में पहले से स्कूल मौजूद है, तो मर्ज करने की क्या जरूरत?
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।
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एबीएसए ने ग्रामीणों को शांत कराया
एबीएसए गोपाल त्यागी ने ग्रामीणों को समझा-बुझाकर मामला शांत कराया। लेकिन बाद में हुई विस्तृत जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पता चला कि प्रिंसिपल अंकित कुमार ने नई तैनाती से बचने के लिए ग्रामीणों को भड़काया और खुद को बंधक बनवाने का नाटक रचा। इतना ही नहीं, उन्होंने इस घटना को मीडिया में गलत तरीके से प्रचारित करवाकर अफसरों को गुमराह करने की कोशिश भी की।
मर्ज की प्रक्रिया और ग्रामीणों का विरोध
बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय के अनुसार, बुलंदशहर जिले में 1,862 सरकारी स्कूल हैं, जिनमें से 509 स्कूलों में छात्रों की संख्या 50 से भी कम है। ऐसे स्कूलों को मर्ज कर आधुनिक सुविधाओं से लैस ‘मॉडर्न स्कूल’ बनाए जा रहे हैं। शकरपुर का प्राथमिक विद्यालय भी इसी नीति के तहत चठेरा गांव के स्कूल के साथ मर्ज किया गया। जिले में अब तक 145 स्कूलों को मर्ज किया जा चुका है। शिक्षा विभाग का दावा है कि यह प्रक्रिया छात्रों के हित में है, जिससे उन्हें बेहतर संसाधन और शिक्षा मिल सकेगी।
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